दर्द…

Gaurav Sangtani हम दर्द को दबाते रहे, ये फूट फूट निकलता रहा कभी चेहरे से झलकता रहा, कभी आँखों से छलकता रहा. हम हर मोड़ पर पुकारा किए और वो हमसे बचके चलता रहा. कितनी दफ़ा गिरे हम राहों मे वो बस दूर से तकता रहा. हमेशा ख्वाब सा ही बनकर रहा मेरे लिए वो, मैं हरदम पकड़ता ... [पूरी पोस्ट]
writer Gaurav Sangtani

Blogrolldreamsgauravख्वाब

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[02 Oct 2007 04:53 AM]

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