तेरी याद में

Gaurav Sangtani कभी यूँ ही लिखा था कुछ तेरी याद मे, तेरी याद आयी तो फिर से गुनगुना दिया आज…. “दर्द की इंतहाँ हो गयी है यारों | सुबह चले थे अब शाम हो गयी है यारों | थक गयें हैं लेकिन कोई सहारा नहीं मिलता | समंदर में मौजों को किनारा नहीं मिल... [पूरी पोस्ट]
writer Gaurav Sangtani

Blogrolldreamsgauravख्वाब

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[14 Oct 2007 13:55 PM]

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