जाते हुए दिन नें

Gaurav Sangtani एक क्षणिका….! जाते हुए दिन ने शाम से बस इतना ही कहा ‘अब भी उदास बैठा है वो, न जाने किस गम को दबाए बैठा है वो | उगते हुए सूरज की किरणें, पँछियों की चहचहाहट, खिलते हुए फूल, सुबह की चाय की चुस्की, स्कूल जाते बच्चों का शोर, धान कूटती औरत... [पूरी पोस्ट]
writer Gaurav Sangtani

dreamsgauravख्वाब

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[15 Oct 2007 14:51 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix