समझे नहीं जो खामोशी मेरी

Gaurav Sangtani समझे नहीं जो खामोशी मेरी, मेरे लब्जों को क्या समझेंगे | बचते रहे उम्र भर साये से मेरे, मेरे जख्मों को क्या समझेंगे | भूल जाना यूँ तो नहीं है, रवायत मोहब्बत की | समझे नहीं जो हालात मेरे, इन रस्मों को क्या समझेंगे | - गौरव संगतानी... [पूरी पोस्ट]
writer Gaurav Sangtani

Blogrolldreamsgauravख्वाब

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[02 Nov 2007 13:43 PM]

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