पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे

Gaurav Sangtani बहुत भुलाना चाहा, बहुत कुछ भुलाया, पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे | वो इश्क की राहों में पहले कदम, उन कदमों पे लङखङाना और संभलना याद है मुझे || वो तेरा नजरे मिलाना और पलकें झुकाना याद है मुझे | वो तेरा सब कुछ समझना और बच के निकलना... [पूरी पोस्ट]
writer Gaurav Sangtani

Blogrolldreamsgauravख्वाब

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[05 Nov 2007 13:03 PM]

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