मंजिलें भी उसकी थी…!

Gaurav Sangtani मंजिलें भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था | एक मैं अकेला था, काफिला भी उसका था | साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी, फिर रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था | आज क्यों अकेला हूँ, दिल सवाल करता है | लोग तो उसके थे, क्या खुदा भी उसका था…... [पूरी पोस्ट]
writer Gaurav Sangtani

Blogrolldreamsख्वाब

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[28 Nov 2007 16:11 PM]

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