तेरा नाम

Gaurav Sangtani नज़्म उलझी हुई है सीने में, मिसरे अटके हुए हैं होठों पर उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज पे बैठते ही नहीं कब से बैठा हुआ मैं जानम, सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा बस तेरा नाम ही मुकम्मल है, इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी……….... [पूरी पोस्ट]
writer Gaurav Sangtani

Blogrolldreamsख्वाब

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[15 Mar 2008 13:39 PM]

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