मेरा मुक़द्दर….!
रातों को चुपके से कोई साया आता है,
हवा का हर झोंका तेरी याद लाता है |
कब तक यूँ ही तपड़ता रहूँगा मैं,
क्यों हर बार मेरा मुक़द्दर मेरे दर से लौट जाता है || गौरव संगतानी...
[पूरी पोस्ट]
Gaurav Sangtani
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[13 Apr 2008 05:19 AM]



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