तेरा ज़िक्र
बस इक झिझक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फसाने में इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में - कैफ़ी आज़मी...
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Gaurav Sangtani
dreamsख्वाब
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[25 May 2008 15:13 PM]



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