कुछ शेर धुंधले से….
कुछ शेर धुंधले से…. कहीं सुने थे कभी…. जिन्होने भी लिखे हैं उन्हे सलाम…
१. तेरी याद मे जल रहा हूँ मैं,
जहाँ तक रोशनी हो… चले आओ.. चले आओ…..!
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२. किस ज़ुबान से करें शिकवा हम उन...
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Gaurav Sangtani
dreamsख्वाब
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[05 Jun 2008 15:07 PM]



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