राह आसान हो गई होगी
राह आसान हो गई होगी जान पहचान हो गई होगी फिर पलट कर निगाह नहीं आई तुझ पे क़ुरबाँ हो गई होगी तेरी ज़ुल्फो को छेडती थी सबा खुद परेशाँ हो गई होगी उन से भी छीन लोगे याद अपनी जिन का ईमान हो गई होगी मरने वालो पे ’सैफ‘ हैरत क्यों मौत आसान हो गई ...
[पूरी पोस्ट]
Gaurav Sangtani
ख्वाब
5
0
0
0
0
[29 Jul 2008 14:00 PM]



Shuffle








