आख़िर क्यूँ..
कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..??? कुछ बातों का कोई कारण नही होता
कोई अर्थ नहीं होता
कोई तर्क नहीं होता
आप स्वीकारें न स्वीकारें….
कोई फर्क नही होता….!!! कुछ सवालों का कोई जवाब नही होता
कोई शुरुआत नही होती
कोई अंत नहीं होत...
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Gaurav Sangtani
Blogrolldreamsgauravख्वाबमेरी आवाज़
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[08 Nov 2008 12:18 PM]



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