चिट्ठाकारी छपास की नहीं पहचान की छटपटाहट है

लिंकित मन जिस लेखन को छपास पीडा के रोगियों का कर्म मानते हुए नाक भौं सिकोडा जा रहा है हिंदी चिट्ठाकारों के लिए वह उनकी पहचान और अस्मिता से जुडा हुआ है! चिट्ठाकार के लिए चिट्ठाकारिता वह सृजन- भूमि है जहां वह निज भाषा में फक्कड और बेबाक अभिव्यक्ति कर सकता है ! इ... [पूरी पोस्ट]
writer Neelima
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[07 Jan 2008 21:10 PM]

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