मेरी श्रीनगर यात्रा (१)
पहला दिन एक हफ्ते पहले से मन दिल्ली में नहीं लग रहा था। चाह रहा थी कि अभी उड कर कश्मीर की वादियों में चला जाउँ। धरती के स्वर्ग को देखने के लिए इच्छा बढती ही जा रही थी। आखिर कार चौदह की रात आ गई पूरी रात ही जैसे आंखों ही आंखो में कटी। पन्द्रह की सुबह...
[पूरी पोस्ट]
दीपान्शु गोयल
7
0
0
0
0
[04 Jul 2008 05:45 AM]



Shuffle








