अकड़ दिखा कर खडा रहा तो
अकड़ दिखा कर खडा रहा तो बहुत बहुत पछतायेगा लोट-पोट हो जा चरणों में आंखों में बस जायगा मैं तेजा-सा वीर बनूँ पर इसमें जोखिम भारी है जिसे बचाऊंगा लपटों से वही मुझे डंस जाएगा उसने तो झूंठे सच्चे इल्जाम लगा कर छोड़ दिए एक अकेला तू बेचारा किस किस को समझायेग...
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jogeshwar garg
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[12 Oct 2009 09:15 AM]



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