आदमी, तरक्की और जिंदगी.

बाल किशन का ब्लॉग कविता नहीं आपको सच्ची घटना सुनाता हूँ. किस्सा नहीं आपको ये हकीकत बताता हूँ. कल सरे-बाज़ार जिंदगी से मुलाकात हुई थी. बेचारी....... पूरी तरह से लुटी-टूटी हुई थी. शरीर पर लिए घूम रही गहरे घाव थी, तेज़ धूप - पसीने से तरबतर-- ढूंढ़ती फ़िर रही वो एक छाँव थी.... [पूरी पोस्ट]
writer बालकिशन
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[03 Oct 2008 04:08 AM]

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