गरीब की लुगाई, धर्मनिरपेक्षता बेचारी
धर्मनिरपेक्षता तो भइया, जैसे गरीब की लुगाई हो गई है। अबला पांचाली के तो पांच ही पति थे, लेकिन इस धर्मनिपेक्षता के तो पचीस खसम उसे अपनी अंकशायिनी बनाने के लिए एक-दूसरे की गर्दन उतारने को तैयार हैं। अब धर्मनिरपेक्षता कनफ्यूज हो गई है। बिचारी को समझ ही...
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भुवन भास्कर
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[25 Apr 2009 02:59 AM]



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