डा. अहमद अली बर्की़ आज़मी की तीन ग़ज़लें

NEERAJ RAJPUT १ सता लें हमको, दिलचस्पी जो है उनकी सताने में हमारा क्या वो हो जाएंगे रुस्वा ख़ुद ज़माने में लड़ाएगी मेरी तदबीर अब तक़दीर से पंजा नतीजा चाहे जो कुछ हो मुक़द्दर आज़माने में जिसे भी देखिए है गर्दिशे हालात से नाला सुकूने दिल नहीं हासिल किसी को इस ज़माने... [पूरी पोस्ट]
writer Neeraj
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[18 Aug 2008 07:56 AM]

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