तुझे किया कहूं अए ज़िन्दगी...
तुझे किया कहूं अए ज़िन्दगी , तेरे एक पल की खबर नहीं में करून यकीन भी तो किस तरहां , तेरी शब् की कोई सहर नहीं मेरी खुवैशूं का यह सिलसिला , है खान तक यह खबर नहीं यह सफ़र सदी पे मुहीत है , मेरी उम्र एक पहर नहीं जहां दो घडी का सकूं मिले ,तेरी राह मैं वोह...
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Neeraj
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[22 Aug 2008 05:18 AM]



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