ज़िन्दगी प्यारी सही लेकिन हमे मरना तो है!
लब पे पाबन्दी नही एहसास पे पहरा तो है फिर भी अहल-ए-दिल को अहवाल-ए-बशर कहना तो है अपनी गैरत बेच डालें अपना मसलाक छोड दें रहनुमाओं मे भी कुछ लोगो को ये मन्शा तो है है जिन्हे सब से ज़्यादा दावा-ए-हुब्ब-ए-वतन आज उन की वजह से हुब्ब-ए-वतन रुसवा तो है बुझ रह...
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Neeraj
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[02 Mar 2009 19:03 PM]



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