एक हवेली, एक कहानी
पुरानी हवेलियां बूढ़ी औरतों की तरह होती हैं. इठलाते बचपन की तरह किसी ने उन्हें प्यार से उठाया. जवान अल्हड़ नक्काशियां की. उनकी चुनरी पर धानी, नीले, लाल, और चटख रंग भरे. उन नशीली हवेलियों ने वो दौर भी देखा जब बुढ़ापे में उनके दरवाजे की रौनक कम होने लग...
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देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
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[15 Sep 2008 09:58 AM]



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