मेरा स्वर्गवास
एक सपना देखा अभी, आधी रात को और फिर नहीं लगी आंख... अब धुंधला सा याद है बस सीढ़ीदार खेत थे पहाड़ियों के... और एक ढलान पर एक गांव सीढ़ियों के रास्ते वाला गांव टूटी सीढ़ियां... पहाड़ी लाल पत्थरों की बीच में कुछ घर थे... बुरांश के पेड़ों से ढंके... एक ह...
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देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
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[05 Mar 2009 13:47 PM]



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