पहला नशा, उम्र भर का ख़ुमार
मौसम यही था, बस उमर कुछ और थी. दीवाली से पहले की हल्की ठंड, बारिश की टिपिर-टिपिर से राहत. अच्छी-सी धूप, मीठा-मीठा गन्ना बिकने लगा था. बारिश में जमी काई धूप से सूखकर झड़ गई और सारे काले-भूरे भुए तितलियाँ बनकर उड़ गए, बरसों बाद हासिल ज्ञान से पता चला क...
[पूरी पोस्ट]
अनामदास
ब्लाग
15
0
0
0
0
[30 Oct 2007 18:18 PM]



Shuffle








