उदासी के भूरे चुभते कंबल में लिपटे दिन-रात

अनामदास का चिट्ठा हरे पेड़ नंगे हो गए हैं, दो महीने पहले तक अधनंगे घूम रहे लोग लबादे लादे डोल रहे हैं. लाल, पीले, गुलाबी फूलों और हरियाली पर धूसर पेंट की बाल्टी उलट दी है किसी ने. यूरोप में सर्दी सांकल खड़का रही है. सड़क पर डाल से बिछड़े पत्तों का अंबार है जो ठंडी हवा... [पूरी पोस्ट]
writer अनामदास

अनामदास

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[13 Nov 2007 18:15 PM]

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