उम्रेदराज़ के चारों दिन कटे

अनामदास का चिट्ठा महीने भर की छुट्टी का महीनों से इंतज़ार था. बहुत सारे वादे-इरादे थे, अपनों से और अपने-आप से भी. दस साल से हर बार यही होता है, मंसूबे बनाए जाते हैं, कुछ पूरे होते हैं और ज्यादातर धरे रह जाते हैं. भारत से जाते हुए हर बार अजब सी कसक होती है, ये सोचकर कि... [पूरी पोस्ट]
writer अनामदास

अनामदास

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[19 Jan 2008 18:59 PM]

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