दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार

अनामदास का चिट्ठा गरम-गरम ख़बरों को साफ़-सुथरा करके आगे बढ़ाने में अब हथेलियाँ नहीं जलतीं, सालों हो गए, आदत पड़ गई है. धमाका, धुआँ, लाशें, आँसू, बिलखते बच्चे... सब होते हैं लेकिन वे अब बेचैन नहीं करते. इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और इसराइल की ख़बरों ने नहीं, अफ्रीकी देश आइवर... [पूरी पोस्ट]
writer अनामदास

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[31 Jan 2008 18:27 PM]

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