खिलौना बंदूक और असली ख़ौफ़

अनामदास का चिट्ठा हिंसा का पारसी थिएटर हमने आपने ही नहीं, मेरे साढ़े तीन साल के बेटे ने भी खूब देखा है. मगर हिंसा का परिणाम किसने, कहाँ और कितनी बार देखा है. एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी के डॉक्टरों, पुलिसवालों और कुछ दूसरे बदक़िस्मत लोगों को पता है कि गोली लगने पर ख़ून कैस... [पूरी पोस्ट]
writer अनामदास

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[10 Mar 2008 21:38 PM]

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