अजित भाई, हिम्मत जवाब दे रही है
आपका बकलमख़ुद सरकलमख़ुद जैसा ही है. कई लोग हिम्मत जुटा लेते हैं, एक हफ़्ते से चिंता में घुला जा रहा हूँ कि आत्मकथानुमा क्या लिखूँ. आपका रिमाइंडर आने ही वाला होगा, दुनिया में शायद आप ही हैं जिसे मेरे सरकलमख़ुद न करने पर मलाल होगा. सच मैं लिख नहीं सकता...
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अनामदास
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[29 Mar 2008 00:29 AM]



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