रसास्वाद और पाठ का पर्याप्त आग्रह

जयप्रकाश मानस जब तक हिंदी के प्राध्यापकों ने अपने उत्तरदायित्वों को संपूर्ण रचनात्मकता के साथ निभाया तब तक हिंदी आलोचना गतिमान बनी रही । उसे ठोस ज़मीन मिलती रही । वहाँ सबकी खोज-खबर होती रही । सबकी धुलाई-पोंछाई होती रही । तब वहाँ केवल शास्त्रीयता का आग्रह नहीं था अ... [पूरी पोस्ट]
writer जयप्रकाश मानस

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[09 Jun 2008 03:02 AM]

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