थाईलैंड में समुद्र मंथन

जयप्रकाश मानस भारतीय संस्कृति एकांगी और सीमित परिधि की संस्कृति नहीं है । वह असीमित है । उसकी धरातल वैश्विक है । उसका स्वदेश कहने को भारतीय उपमहाद्वीप है, परंतु सच तो यह भी है कि वह अनचीन्हें भूगोल में भी समुज्ज्वलित है । उसकी बेलें, उसकी महक सिर्फ़ अटक से कटक और... [पूरी पोस्ट]
writer जयप्रकाश मानस

मित्र प्रसंग

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[08 Dec 2008 21:21 PM]

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