फैज़ अहमद फैज़ को याद करते हुए

कॉफी हाउस हम देखेंगे लाजिम है कि हम भी देखेंगे वो दिन कि जिसका वादा है जो लौह-ए-अजल में लिखा है जब जुल्म ए सितम के कोह-ए-गरां रुई की तरह उड़ जाएँगे दम महकूमों के पाँव तले जब धरती धड़ धड़ धड़केगी और अहल-ए-हिकम के सर ऊपर जब बिजली कड़ कड़ कड़केगी हम अहल-ए-सफा, मरदूद-ए-ह... [पूरी पोस्ट]
writer bhupen

फैज़ अहमद फैज़

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[14 Feb 2008 15:22 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix