ईकोपा...
आज शायद आख़िरी बार मैं ईकोपा (मेरा घर....) के साथ बैठा हूँ...। दरारें........ कुछ छोटे चहबच्चों से जाले, कुछ बड़े भी... पीठ और सिर के निशानों से भीगी हुई दीवारें, और कुछ नाखूनों के खुरचने का दर्द ली हुई दीवारें....। मैं शांत था... वहीं अपनी कुर्सी पर ब...
[पूरी पोस्ट]
मानव
अपने से...
4
0
0
0
0
[05 Dec 2008 14:20 PM]



Shuffle








