जहां लिखना सीखा

हिमाल : अपना-पहाड़ मैं जैसा भी हूं, ऐसा क्यों हूं ? जब मैंने ये सवाल ख़ुद से पूछा, तो मैं मेरे अतीत में चला गया। अतीत के पन्नों पर पड़ी धूल को हाथों से साफ किया.... तो फिर कई पन्ने साफ-साफ चमकने लगे। इनमें से कुछ पन्ने बड़े चमकदार हैं। अतीत के एक पन्ने पर चमकीले अक्षरो... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट

मेरे इर्द-गिर्द

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[28 Apr 2009 15:05 PM]

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