तिन्नी की आत्मकथा
शनिवार रात तिन्नी एक कैलेंडर ले आई। कहा कि इसमें तुम लिखो और मैं बोलती रहूंगी कि तिन्नी क्या क्या करती है। ऐसा करने का ख़्याल कहां से आया भगवान जाने लेकिन तिन्नी की बातों को जब मैं कैलेंडर के पीछे लिखता तो देखकर हैरान हो जाती। वो हिंदी के लंबे लंबे व...
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ravish kumar
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[13 Jul 2008 00:33 AM]



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