लूट सको तो लूट लो (1)
जब हर तरफ लूट मची हो तो आम नागरिक के हाथ निराशा ही तो लगेगी। काम कोई भी कराना हो, बिना कुछ खर्च किए नहीं होने वाला है। शिक्षा के मंदिर भी अब लूटने में पीछे नहीं हैं। चाहे किसी कक्षा में दाखिला लेना हो या फिर घर बैठे डिग्री लेनी हो। अगर पैसा खर्च करोग...
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सचिन मिश्रा
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[30 Dec 2008 15:45 PM]



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