कविता सीखो हे कविराज…

शत् शत् नम अभी कुछ दिन पूर्व सागर भाईसा बचपन की यादों में खोये थे। हमें मालूम न था सो आदतन पूछ लिया, “कैसे हो सागर भाईसा?” जवाब में सागर भाई नें अपनी पोस्ट का लिंक थमा दिया। पहले हम उस लिंक की उंगली पकड़कर उनके चिट्ठे पर फिर वहाँ से एक नये लिंक पर सवार होकर तरकश... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिराज जोशी

कविताएँ

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[09 Sep 2007 03:37 AM]

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