कुछ ऐसे ही… :)

शत् शत् नम चंद बाते हँसकर जो कर ली उनके साथ, वे पूछ बैठे, "जानू, कब कर रहे हो शादी?" हम करने लेगें है खुलकर दिल की बात शर्माना छोड़ो तुम भी, तो कुछ बात बनें फूल नहीं, मेरी मोहब्बत के चिथड़े थे, बरसे जो तुझ पर तेरे निकाह की रात मुझसे पूछे बगैर तुम क... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिराज जोशी

कविताएँ

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[09 Sep 2007 03:36 AM]

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