खूबसूरत कविता
मॆं/जब भी लिखना चाहता हूं कोई खूबसूरत कविता अभावों की कॆंची कतर देती हॆ मेरे आदर्शों के पंख. कानों में- गूंजती हॆं- आतंकित आवाजें न अजान,न शंख. मॆं/जब भी लिखना चाहता हूं कोई खूबसूरत कविता भ्रष्टाचारी रावण चुरा ले जाता हे ईमानदारी की सीता. मॆं/जब भी ल...
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विनोद पाराशर
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[11 Nov 2007 11:56 AM]



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