आज बहुत सर्दी हॆ
आज बहुत सर्दी हॆ पक्षियों का चहचहाना, फूलों का मुस्कराना, ऒर-कोयल की कूक से, मंत्र-मुग्ध हो जाना, खत्म हो गया हॆ. आज बहुत सर्दी हॆ रामलाल- सेठ के यहां, मजदूरी कम मिलने पर, नहीं चिल्लायेगा, चुपचाप आ जायेगा. आज बहुत सर्दी हॆ शरीर का हर अंग शून्य हो गया...
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विनोद पाराशर
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[21 Dec 2007 03:56 AM]



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