मॆं ऒर तुम

नया घर मॆं-नहीं चाहता कि तुम ऒपचारिकता का लिबास पहनकर मेरे नजदीक आओ. अपने होठों पर झूठ की लिपिस्टिक लगाकर सच को झुठलाओ या देह-यष्टि चमकाने के लिए कोई सुगंधित साबुन या इत्र लगाओ. मॆं-चाहता हूं कि तुम अपनी असली झिलमिलाहट के साथ मुझसे लिपट जाओ. मेरे सुसुप्त भा... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद पाराशर
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[30 Dec 2007 02:15 AM]

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