तप्त तन मन की धरा को तुम सजल कर दो

अनुभूतियाँ छाकर मेरे उर व्योम पर तुम मेघ सा, बरसो । तप्त तन मन की धरा को तुम सजल कर दो । कंठ को मेरे, सुकोमल निज करों का हार दे दो । कर्ण को मेरे, प्रतीक्षित शब्द का उपहार दे दो । सुप्त मेरी धमनियों में रक्त का संचार कर दो , गर्म अपनी साँस, मेरी साँस में भर दो... [पूरी पोस्ट]
writer प्रताप नारायण सिंह
views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[15 Jul 2009 04:58 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix