जरा आजकल तबियत नासाज़ रहती है लिखने का तो बहुत दिल करता है मगर शब्द हैं कि आह !बनकर उड़ जाते हैं पकड़ने की कोशिश जारी है…
बड़े-बड़े सपने जो अचानक दिखाये थे तुमने! वो सब सपने दिल की दहलीज़ पर आकर खुशी में बरसे आँसुओं की झड़ी में फिसल कर रह गये… काश ! मैंने उन सपनों को जिया ना होता… काश ! मैंने उन्हें सच ना माना होता… काश ! मैंने उन्हें दिल की धड़कन में ना समाया होता… काश...
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Dr.Bhawna
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[26 Jun 2008 05:53 AM]



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