शहीदों को शत-शत नमन...

दिल के दरमियाँ कफन में लिपटे… अपने बेटे को देख ! माँ का कलेज़ा फट पड़ा ! आँसू आँख से नहीं दिल से बहे थे… ऊँगलियाँ थी कि… उसके चेहरे से नहीं हटती… मुँह से बस यही आवाज़ निकली ! वाह मेरे लाल ! मुझे नाज़ है तुझ पर बचा लिया तूने कितनी ही… माँ की गोद को उज़ड़ने से… बचा लिया... [पूरी पोस्ट]
writer Dr.Bhawna
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[29 Nov 2008 04:07 AM]

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