अनकही दास्ताँ...

दिल के दरमियाँ आप सभी मित्रों के सहयोग और स्नेह के कारण आज़ मैं भी कर पूरी कर पाई सैंचुरी और कोई समय होता तो आप सबको केक खिलाया जाता पहले की तरह लेकिन कोई बात नहीं उधार रहा जैसे ही मूड़ अच्छा होगा आप सबको केक खिलाया जायेगा... आज़कल कुछ अनजान सायों के बीच घिरी रहती हू... [पूरी पोस्ट]
writer Dr.Bhawna
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[18 Dec 2008 04:30 AM]

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