मैं सागर के पास जब लहर करे क्यों घात ...........

कुछ सोंचा कुछ बाक़ी है दिवस बीति रहि आश में आश ना आशा कोय वहि आशा नहीं आश है जिह मैं आशा ना होय ॥ १ ॥ यह जीवन तो फूल है फ़िर क्यों बनता धूल तूं सुख की सागर निधि करता क्योंकर भूल ॥ २॥ राम नाम तूं राम कह कह ना दूजो नाम राम सुबह का नाम है बाकी से है शाम ॥ ३॥ यह जन्म सुख का पुं... [पूरी पोस्ट]
writer anilpandey
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[21 Aug 2008 01:30 AM]

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