कलयुग महिमा ......

कुछ सोंचा कुछ बाक़ी है है युग कलयुग नाम अपारा । सुमिरत भागत सुख संसारा ॥ जौ केहु चाह सदा लड़खड़ाना । कलयुग नाम जपहूँ प्रभु जाना ॥ बिन कलयुग के झगड़ा ना होई । मूरख गदहा दलिद्र कह सोयी ।. अन्दर सास पतोहू के रहता । करत रहत सबके मुंह भरता ॥ बेटवा बोलै जौ गुस्साई । मेहर खीझि के... [पूरी पोस्ट]
writer anilpandey
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[23 Aug 2008 02:33 AM]

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