जीता आया जीवन क्या जीनें के लिए ही ............

कुछ सोंचा कुछ बाक़ी है पूछता हूँ कभी कभी आत्मीयता से उठकर ज्यों छोटा बच्चा पूछता है बड़ों से हुडुककर क्या जीवन बना है बस जीने के लिए ही जीता आया जीवन क्या जीनें के लिए ही रख उम्मीदे फ़िर दिल में सोचता हूँ मैं अभी तो दिन बहुत से हैं सवरने के लिए छोटा था , चलना , पढ़ना ,सीखा स... [पूरी पोस्ट]
writer anilpandey
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[01 Sep 2008 00:13 AM]

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