अच्छा तो हमें नशीब नहीं बुरा ही बस बनते चलो ...
दोस्त तुम घटे चलो यार तुम मिटे चलो अयोग्यता का प्रचार हो विद्वता का संघार हो ना आएगी कुसमय कभी ये न होगी दुर्दशा कभी ये निर्माण से विनाश पथ पर ऐ यार तुम डटे चलो ॥ संसार है पलट रहा हर द्वार है उलट रहा पहले जहा तरु-पत्तियां , अब धूल ही उचट रहा क्या पेड...
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anilpandey
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[11 Oct 2008 05:25 AM]



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