वह मजदूर - २

कुछ सोंचा कुछ बाक़ी है ऊपरी हिस्से से चली नीचे के तरफ़ बढती चूने लगी कुछ क्षण बाद टिप टिप टिप टिप नीचे की उर्वर भूमि तक पहुँचती , तरलता प्रदान करती शीतलता देती शरीर के सम्पूर्ण हिस्से को झकझोर देने के बाद वेदनामय वातारण में पोंछता एक एक हिस्से से शरीर का पसीना वह मजदूर गहर... [पूरी पोस्ट]
writer anilpandey
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[27 Mar 2009 08:20 AM]

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