कता

संजीवनी कभी इधर कभी उधर दिखाई देते हैं । हर एक मुद्दे पर मुखर दिखाई देते हैं ॥ दिलों में उनके सियासत के ऐब हैं सारे - जो नैन -ओ नक्श से सुंदर दिखाई देते हैं ॥ 'विनय ओझा 'स्नेहिल'... [पूरी पोस्ट]
writer विनय ओझा 'स्नेहिल'
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[11 Aug 2008 02:13 AM]

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